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चाँद आहें भरेगा - फूल बने अंगारे (1963)

गीत: चाँद आहें भरेगा, फूल दिल थाम लेंगे
फ़िल्म: फूल बने अंगारे (1963)
संगीतकार: कल्याणजी-आनंदजी
फ़िल्मांकन: माला सिन्हा, राजकुमार
स्वर: मुकेश कुमार



गीत के बोल:

चाँद आहें भरेगा, फूल दिल थाम लेंगे
चाँद आहें भरेगा, फूल दिल थाम लेंगे
हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेंगे

ऐसा चेहरा हैं तेरा, जैसे रोशन सवेरा
जिस जगह तू नहीं है उस जगह है अँधेरा
ऐसा चेहरा हैं तेरा, जैसे रोशन सवेरा
जिस जगह तू नहीं है उस जगह है अँधेरा

कैसे फिर चैन तुझ बिन तेरे बदनाम लेंगे
कैसे फिर चैन तुझ बिन तेरे बदनाम लेंगे
हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेंगे

चाँद आहें भरेगा...

आँख नाज़ुक-सी कलियाँ, बात मिसरी की डालियाँ
होंठ गंगा के साहिल ज़ुल्फें,जन्नत की गलियाँ
आँख नाज़ुक-सी कलियाँ,बात मिसरी की डालियाँ
होंठ गंगा के साहिल ज़ुल्फें,जन्नत की गलियाँ

तेरी ख़ातिर फ़रिश्तें, सर पे इल्ज़ाम लेंगे
तेरी ख़ातिर फ़रिश्तें, सर पे इल्ज़ाम लेंगे
हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेंगे

चाँद आहें भरेगा...

चुप न होगी हवा भी,कुछ कहेगी घटा भी
और मुमकिन है तेरा,ज़िक्र कर दे ख़ुदा भी
चुप न होगी हवा भी,कुछ कहेगी घटा भी
और मुमकिन है तेरा,ज़िक्र कर दे ख़ुदा भी

फिर तो पत्थर भी शायद जफ्त से काम लेंगे
फिर तो पत्थर भी शायद जफ्त से काम लेंगे

चाँद आहें भरेगा फूल दिल थाम लेंगे
हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेंगे

चाँद आहें भरेगा चाँद आहें भरेगा फूल दिल थाम लेंगे
हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेंगे...

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मुकेश 5866724559269643418

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  1. Behad sunder geet. Anand Bakshi Sahab ka jawab nahi...Us par Mukesh ji ke swar saath Kalyan ji aur Anand ji ka.. Kya baat hai..Thanks for sharing.

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  2. वाह ... आनंद बक्षी साहब के लिखे गीत ... मुकेश की आवाज़ ... मज़ा ही आ गया ...

    ReplyDelete
  3. Mt puchiye, dil tham ke baith jati hu jab bandniy bakshi ji ka nam aata haiचाँद आहें भरेगा चाँद आहें भरेगा फूल दिल थाम लेंगे
    हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेंगे...


    आनंद बक्षी । एक महान गीतकार

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  4. @Quamar ji, Naswa ji, & Madhu ji...

    Thanks!

    ReplyDelete

आनन्द बक्षी साहब को समर्पित इस ब्लॉग पर प्रशंसक बनकर उन्हें श्रद्धांजलि दें।

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Anand Bakshi

Legend Anand Bakshiआनंद बक्षी का जन्म रावलपिंडी (जो अब पाकिस्तान में है) में 21 जुलाई 1930 को हुआ। जब दस वर्ष के हुए तो माँ सुमित्रा का देहान्त हो गया। बँटवारे के बाद 2 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान से भारत आ गये। पहले स्विच बोर्ड अपेरेटर और फिर जब तक बाम्बे फ़िल्म जगत में काम नहीं मिला फ़ौज में थे। आये तो थे गायक बनने लेकिन गीतकार के रूप बहुत सफल रहे। यशराज चोपड़ा, बी आर चोपड़ा, मनमोहन देसाई, सुभाष घई जैसे बड़े फ़िल्मकारों के साथ काम किया और सफलता उनके क़दम चूमती रही।

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