चिट्ठी आयी है, आयी है, चिट्ठी आयी है - नाम (१९८६)
गीत: चिट्ठी आयी है, आयी है, चिट्ठी आयी है
चित्रपट: नाम (1986)
संगीत: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: आनंद बक्षी
स्वर: पंकज उधास
विडियो गीत:
गीत के बोल:
चिट्ठी आयी है, आयी है, चिट्ठी आयी है
चिट्ठी आयी है, वतन से चिट्ठी आयी है
बड़े दिनों के बाद, हम बे-वतनों को याद
वतन की मिट्टी आयी है...
ऊपर मेरा नाम लिखा है, अन्दर ये पैग़ाम लिखा है
ओ परदेस को जाने वाले, लौटके फिर न आने वाले
सात समुंदर पार गया तू, हमको ज़िंदा मार गया तू
ख़ून के रिश्ते तोड़ गया तू, आँख में आँसू छोड़ गया तू
कम खाते हैं कम सोते हैं, बहुत ज़ियादा हम रोते हैं
चिट्ठी आयी है, आयी है, चिट्ठी आयी है
चिट्ठी आयी है, वतन से चिट्ठी आयी है
सूनी हो गयी शहर की गलियाँ, काँटे बन गयी बाग़ की कलियाँ
कहते हैं सावन के झूले, भूल गया तू हम न भूले
तेरे बिन जब आयी दिवाली, दीप नहीं दिल जले हैं ख़ाली
तेरे बिन जब आयी होली, पिचकारी से छूटी गोली
पीपल सूना पनघट सूना, घर शमशान का बना नमूना
फ़सल कटी आयी बैसाखी, तेरा आना रह गया बाक़ी
चिट्ठी आयी है, आयी है, चिट्ठी आयी है
चिट्ठी आयी है, वतन से चिट्ठी आयी है
पहले जब तू ख़त लिखता था, काग़ज़ में चेहरा दिखता था
बंद हुआ ये मेल भी अब तो, ख़त्म हुआ ये खेल भी अब तो
डोली में बैठी है बहना, रस्ता देख रहे थे नयना
मैं बाप हूँ मेरा क्या है, तेरी माँ का हाल बुरा है
तेरी बीवी करती है सेवा, सूरत से लगती है बेवा
तूने पैसा बहुत कमाया, इस पैसे ने देस छुड़ाया
देस पराया छोड़ के आ जा, पंछी पिंजरा तोड़ के आ जा
आ जा उमर बहुत है छोटी, अपने घर में भी है रोटी
चिट्ठी आयी है, आयी है, चिट्ठी आयी है
चिट्ठी आयी है, वतन से चिट्ठी आयी है
चित्रपट: नाम (1986)
संगीत: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: आनंद बक्षी
स्वर: पंकज उधास
विडियो गीत:
गीत के बोल:
चिट्ठी आयी है, आयी है, चिट्ठी आयी है
चिट्ठी आयी है, वतन से चिट्ठी आयी है
बड़े दिनों के बाद, हम बे-वतनों को याद
वतन की मिट्टी आयी है...
ऊपर मेरा नाम लिखा है, अन्दर ये पैग़ाम लिखा है
ओ परदेस को जाने वाले, लौटके फिर न आने वाले
सात समुंदर पार गया तू, हमको ज़िंदा मार गया तू
ख़ून के रिश्ते तोड़ गया तू, आँख में आँसू छोड़ गया तू
कम खाते हैं कम सोते हैं, बहुत ज़ियादा हम रोते हैं
चिट्ठी आयी है, आयी है, चिट्ठी आयी है
चिट्ठी आयी है, वतन से चिट्ठी आयी है
सूनी हो गयी शहर की गलियाँ, काँटे बन गयी बाग़ की कलियाँ
कहते हैं सावन के झूले, भूल गया तू हम न भूले
तेरे बिन जब आयी दिवाली, दीप नहीं दिल जले हैं ख़ाली
तेरे बिन जब आयी होली, पिचकारी से छूटी गोली
पीपल सूना पनघट सूना, घर शमशान का बना नमूना
फ़सल कटी आयी बैसाखी, तेरा आना रह गया बाक़ी
चिट्ठी आयी है, आयी है, चिट्ठी आयी है
चिट्ठी आयी है, वतन से चिट्ठी आयी है
पहले जब तू ख़त लिखता था, काग़ज़ में चेहरा दिखता था
बंद हुआ ये मेल भी अब तो, ख़त्म हुआ ये खेल भी अब तो
डोली में बैठी है बहना, रस्ता देख रहे थे नयना
मैं बाप हूँ मेरा क्या है, तेरी माँ का हाल बुरा है
तेरी बीवी करती है सेवा, सूरत से लगती है बेवा
तूने पैसा बहुत कमाया, इस पैसे ने देस छुड़ाया
देस पराया छोड़ के आ जा, पंछी पिंजरा तोड़ के आ जा
आ जा उमर बहुत है छोटी, अपने घर में भी है रोटी
चिट्ठी आयी है, आयी है, चिट्ठी आयी है
चिट्ठी आयी है, वतन से चिट्ठी आयी है

शुक्रिया भाई बड़े दिनों से यह लिंक खुल नहीं रहा था सो आपका शुक्रिया भी अदा न कर सके .
ReplyDeleteबृहस्पतिवार, 9 अगस्त 2012
औरतों के लिए भी है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा प्रणाली
औरतों के लिए भी है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा प्रणाली
ram ram bhai
http://veerubhai1947.blogspot.com/
इस बेहतरीन गीत की प्रस्तुति के लिए आभार
ReplyDelete