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सुन बन्तो बात मेरी - महाचोर (1976)

Friday 4 September 2009
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गीत: सुन बन्तो बात मेरी
फ़िल्म: महाचोर (1976)
संगीतकार: राहुल देव बर्मन
कलाकार: नीतू सिंह, राजेश खन्ना
स्वर: आनन्द बक्षी, आशा भोंसले

Sun Banto Baat Meri - Maha Chor (1976) from Vinay Prajapati on Vimeo.


गीत के बोल:

आनन्द बक्षी:
सुन बन्तो बात मेरी, हाय सुण बन्तो बात मेरी
दिन ताँ गुज़र जायेगा, नइ यूँ कटणी रात मेरी
दिन ताँ गुज़र जायेगा, नइ कटणी रात मेरी

आशा भोंसले:
रहने दे यह बेताबी, वे छूटेया, रहने दे यह बेताबी,
मैं घर नहीं जाना, लै फण घर दी चाबी...
मैं घर नहीं जाना, लै फण घर दी चाबी...

आनन्द बक्षी:
ओ चुप करके गड्डी दे विच बैण जा
चुप करके गड्डी दे विच बैण जा
जे रोई ते चपेड़ खायेंगी, रोई ते चपेड़ खायेंगी

आशा भोंसले:
तेरी गड्डी विच नहीं बैणाँ
वे जा तेरी गड्डी विच नहीं बैणाँ
जित्थे तेरी याद आये उत्थे बैठके रो लेणाँ
जित्थे तेरी याद आये उत्थे बैठके रो लेणाँ

आनन्द बक्षी:
मैं तुझे घर से भगा के नहीं लाया,
तुझे घर से भगा के नहीं लाया
कि आयी है तू मर्ज़ी से, आयी है तू मर्ज़ी से

आशा भोंसले:
हट छोड़ मज़ाक चन्ना, ओय हट छोड़ मज़ाक चन्ना
तेरी मेरी नइ निभणी, मैंनूँ दे दे तलाक़ चन्ना
तेरी मेरी नइ निभणी, मैंनूँ दे दे तलाक़ चन्ना

आनन्द बक्षी:
तैं अपने घर रहना था, अपने घर रहना था
डोली में ना डाले... बाबुल से कहना था
डोली में ना डाले... बाबुल से कहना था

आशा भोंसले:
मेरे बाबुल का नाम न लेना, मेरे बाबुल का नाम न लेना
तू चाहे मेरी जान कड लै, चाहे मेरी जान कड लै

आनन्द बक्षी:
हो.. इक रूठे तै दूजा मनाये, इक रूठे तै दूजा मनाये
यही तो प्यार है मित्राँ, इक रूठे...

आशा भोंसले:
तुम समझे मैं रूठ गयी, वे जाँ तुम समझे मैं रूठ गयी,
उमराँ दी यारी पल्लाँ विच टूट गयी
उमराँ दी यारी पल्लाँ विच टूट गयी

चुपके-चुपके चल री पुरवाइया

Tuesday 1 September 2009
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गीत: चुपके-चुपके चल री पुरवाइया
फ़िल्म: चुपके-चुपके (1975)
संगीतकार: सचिन देव बर्मन
कलाकार: जया भादुड़ी, अमिताभ बच्चन
स्वर: लता मंगेश्कर

Chupke-Chupke Chal Rii Purwaiya from Vinay Prajapati on Vimeo.


गीत के बोल:

चुपके-चुपके चल री पुरवाइया -2
बाँसुरी बजाये रे रास रचाये,
दइया रे दइया,
गोपियों संग कन्हैया...

चुपके-चुपके चल री पुरवाइया -2

पागल पवन से कैसे कोई बोले -2
गोरी के मुख से घूँघटा न खोले
डोले हौले से मन की नैय्या,
गोपियों संग कन्हैया...

चुपके-चुपके चल री पुरवाइया -2

ऐसे समय पे कोई चुप भी रहे कैसे -2
बाँध लिए रुत ने पग में घुँघरू जैसे
नाचे मन ता थैय्या ता थैय्या
गोपियों संग कन्हैया...

चुपके-चुपके चल री पुरवाइया -2

वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा

Saturday 15 August 2009
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गीत: वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा
फ़िल्म: फूल बने अंगारे (1963)
संगीतकार: कल्याणजी-आनंदजी
फ़िल्मांकन: माला सिन्हा, राजकुमार
स्वर: मो. रफ़ी



गीत के बोल:
हिमाला की बुलन्दी से, सुनो आवाज़ है आयी
कहो माँओं से दें बेटे, कहो बहनों से दें भाई

वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा
रहेगी जब तलक दुनिया, यह अफ़साना बयाँ होगा
वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा

हिमाला कह रहा है इस वतन के नौजवानों से
खड़ा हूँ संतरी बनके मैं सरहद पे ज़मानों से
भला इस वक़्त देखूँ कौन मेरा पासबाँ होगा
वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा

चमन वालों की ग़ैरत को है सैय्यादों ने ललकारा
उठो हर फूल से कह दो कि बन जाये वो अंगारा
नहीं तो दोस्तों रुसवा, हमारा गुलसिताँ होगा

वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा
वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा
रहेगी जब तलक दुनिया, यह अफ़साना बयाँ होगा
वतन पे जो फ़िदा होगा अमर वो नौजवाँ होगा

हमारे एक पड़ोसी ने, हमारे घर को लूटा है
हमारे एक पड़ोसी ने, हमारे घर को लूटा है
भरम इक दोस्त की बस दोस्ती का ऐसे टूटा है
कि अब हर दोस्त पे दुनिया को दुश्मन का गुमाँ होगा
वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा

सिपाही देते हैं आवाज़, माताओं को, बहनों को
हमें हथियार ले दो, बेच डालो अपने गहनों को
कि इस क़ुर्बानी पे क़ुर्बां वतन का हर जवाँ होगा

वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा
रहेगी जब तलक दुनिया, यह अफ़साना बयाँ होगा
वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा

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